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कैबिनेट ने ‘आत्मनिर्भर भारत’ के लिए राष्ट्रीय यूरिया निवेश नीति-2026 (NIPU-2026) को दी मंजूरी

देश में गैस आधारित नए यूरिया संयंत्रों की स्थापना को मिलेगा बढ़ावा, यूरिया उत्पादन में आत्मनिर्भरता की दिशा में महत्वपूर्ण कदम

PNS,नई दिल्ली, 15 जुलाई 2026

प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में हुई आर्थिक मामलों की मंत्रिमंडलीय समिति (CCEA) ने उर्वरक विभाग के ‘आत्मनिर्भर भारत’ के लिए राष्ट्रीय यूरिया निवेश नीति-2026 (National Investment Policy for Urea-2026 for Atmanirbhar Bharat – NIPU-2026) के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है।

नई नीति का उद्देश्य देश में गैस आधारित नए यूरिया विनिर्माण संयंत्रों की स्थापना को प्रोत्साहित करना और यूरिया उत्पादन में आत्मनिर्भरता हासिल करना है। इससे घरेलू उत्पादन बढ़ेगा तथा आयात पर निर्भरता कम करने में मदद मिलेगी।

पारदर्शिता बढ़ाने और निवेश आकर्षित करने पर जोर

एनआईपीयू-2026 में वर्ष 2012 की नीति (NIP-2012) की तुलना में कई महत्वपूर्ण बदलाव किए गए हैं। इनमें स्थिर (फिक्स्ड) और परिवर्ती (वेरिएबल) लागतों को अलग-अलग निर्धारित करना, 12 प्रतिशत से 16 प्रतिशत तक का व्यवहार्य इक्विटी प्रतिफल (Return on Equity-RoE) दायरा तय करना तथा चार वर्ष बाद प्रचलित विनिमय दर के आधार पर स्थिर लागत को भारतीय रुपये में परिवर्तित कर विदेशी मुद्रा विनिमय जोखिम को कम करना शामिल है।

सरकार के अनुसार, इन सुधारों से NIPU-2026 के तहत स्थापित प्रत्येक नए यूरिया संयंत्र पर NIP-2012 की तुलना में 250 करोड़ रुपये से अधिक की बचत होने का अनुमान है।

नई यूरिया इकाइयों की स्थापना को मिलेगा प्रोत्साहन

नई नीति के तहत देश में स्थापित होने वाले सभी नए यूरिया विनिर्माण संयंत्र राष्ट्रीय यूरिया निवेश नीति-2026 के दायरे में आएंगे। इससे घरेलू निवेश को बढ़ावा मिलेगा और यूरिया उत्पादन क्षमता में उल्लेखनीय वृद्धि होगी।

पृष्ठभूमि

देश में यूरिया क्षेत्र में निवेश आकर्षित करने के लिए उर्वरक विभाग ने वर्ष 2012 में नई निवेश नीति (NIP-2012) लागू की थी। इस नीति के तहत पुनरुद्धार (Revamp), विस्तार (Expansion), ब्राउनफील्ड और ग्रीनफील्ड परियोजनाओं को प्रोत्साहित किया गया।

NIP-2012 के तहत कुल छह नए यूरिया संयंत्र स्थापित किए गए, जिनमें चार संयंत्र नामित सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों के संयुक्त उद्यम (Joint Venture Companies) तथा दो संयंत्र निजी कंपनियों द्वारा स्थापित किए गए। इस नीति के तहत नए निवेश की अवधि अक्टूबर 2019 में समाप्त हो गई थी।

वर्तमान में देश में 33 यूरिया विनिर्माण संयंत्र संचालित हैं, जिनकी कुल पुनर्मूल्यांकित/स्थापित क्षमता 269.42 लाख मीट्रिक टन (LMT) है। हालांकि, घरेलू उत्पादन और मांग के बीच अभी भी अंतर बना हुआ है, जिसकी पूर्ति यूरिया आयात के माध्यम से की जाती है।

उर्वरक विभाग को नए यूरिया संयंत्रों की स्थापना के लिए विभिन्न प्रस्ताव प्राप्त हुए हैं। ऐसे में राष्ट्रीय यूरिया निवेश नीति-2026 को मंजूरी मिलने से घरेलू उत्पादन क्षमता बढ़ाने, आयात निर्भरता कम करने और आत्मनिर्भर भारत के लक्ष्य को गति मिलने की उम्मीद है।

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